बैंक में अपना बचत खाता खुलवाना और अपनी कंपनी का चालू खाता खुलवाना, दोनों में फ़ॉर्म और दस्तावेज़ बहुत अलग माँगे जाते हैं। पहले में बैंक आपसे पूछता है कि आप कौन हैं। दूसरे में बैंक पूछता है कि कंपनी सचमुच है या नहीं, उसे चलाता कौन है, मालिक असल में कौन हैं, और आपको कंपनी की तरफ़ से दस्तख़त करने का हक़ किसने दिया। पहली जाँच को KYC कहते हैं और दूसरी को आम तौर पर KYB।
सीधा नियम यह है कि ग्राहक व्यक्ति हो तो KYC चलाइए, और कंपनी, फ़र्म, LLP या ट्रस्ट जैसी कोई संस्था हो तो KYB। पर असल ऑनबोर्डिंग में दोनों बीच में मिलती हैं, क्योंकि हर कारोबार को इंसान चलाते हैं। इसलिए कारोबारी ग्राहक पर अक्सर दो जाँचें लगती हैं: संस्था पर KYB और उस व्यक्ति पर KYC जो उसकी तरफ़ से आवेदन कर रहा है।
एक बात शुरू में साफ़ कर दें, क्योंकि इसी से आपकी ज़िम्मेदारियों की जड़ समझ आती है। नियामक KYC शब्द इस्तेमाल करते हैं और भारतीय नियमों में KYC व्यक्तियों के साथ-साथ कानूनी संस्थाओं को भी कवर करता है। KYB उद्योग का चलन वाला शब्द है, उसी काम के संस्था वाले आधे हिस्से के लिए। यानी आपको कौन-सी जाँच करनी ही होगी, यह आपके नियामक, आपके लाइसेंस और पार्टनर बैंक के अनुबंध से तय होता है, किसी "KYB" नाम के कानून से नहीं।
यह गाइड उन प्रोडक्ट मैनेजरों के लिए है जो तय कर रहे हैं कि क्या इकट्ठा करना है, उन compliance साथियों के लिए जो चेकलिस्ट लिखते हैं, और उन इंजीनियरों के लिए जिन्हें चेकलिस्ट को API calls में बदलना है।
मुख्य बातें
- KYC एक व्यक्ति के बारे में है: वह कौन है, पहचान उसकी है या नहीं, और उससे संपर्क कैसे होगा। KYB एक संस्था के बारे में है: वह मौजूद है, उसकी स्थिति क्या है, उसे कौन चलाता और कौन असल में उसका मालिक है, और उसकी तरफ़ से हस्ताक्षर कौन कर सकता है।
- कारोबारी ग्राहक पर दोनों लगती हैं। संस्था पर KYB, और आवेदन करने वाले व्यक्ति पर KYC के साथ अधिकार का सबूत।
- भारत में कानूनी तौर पर KYC और customer due diligence ही शब्द चलते हैं, व्यक्ति और संस्था दोनों के लिए। KYB नाम की अलग कोई वैधानिक चीज़ नहीं है।
- कौन-सी जाँच चलेगी, यह संस्था के प्रकार पर निर्भर है: प्रोपराइटरशिप मालिक के ज़रिए, कंपनी रजिस्ट्री और टैक्स रजिस्ट्रेशन के ज़रिए, ट्रस्ट डीड और ट्रस्टियों के ज़रिए।
- StampMitra पहचान और रजिस्ट्री की जाँच PAN, GSTIN, CIN, Udyam और bank account endpoint से देता है। वह Aadhaar आधारित verification नहीं देता, और बोर्ड प्रस्ताव, पार्टनरशिप डीड या beneficial ownership घोषणा जैसे दस्तावेज़ों की जगह नहीं लेता।
- Beneficial ownership KYB का सबसे कठिन हिस्सा है। रजिस्ट्री लुकअप में निदेशक दिखते हैं, वे लोग नहीं जो असल में मालिक या नियंत्रक हैं। इसलिए घोषणा और उसके सबूत लेने पड़ते हैं।
- दोनों को एक ही pipeline की तरह बनाइए, जहाँ "पक्ष" (party) या तो व्यक्ति है या संस्था और जाँचें प्रकार से चुनी जाती हैं। कोड को दो हिस्सों में मत बाँटिए।
- संस्थाओं की दोबारा जाँच व्यक्तियों से ज़्यादा मायने रखती है, क्योंकि संस्थाओं की स्थिति, निदेशक और रजिस्ट्रेशन बदलते रहते हैं।
सबसे पहले: किसे कौन-सी जाँच चाहिए
कोड से पहले हालात की तालिका देखिए, क्योंकि अक्सर सवाल "API कौन-सी" से पहले "ग्राहक कौन" का होता है।
| हालात | संस्था की जाँच | व्यक्ति की जाँच | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| किसी व्यक्ति को कर्ज़ | कोई नहीं | PAN, बैंक खाता | पते और स्वामित्व के जो कदम आपकी नीति माँगे वे जोड़ें |
| किसी कंपनी को कर्ज़ | PAN, GSTIN, CIN, स्थिति | हस्ताक्षरकर्ता का PAN, अधिकार का दस्तावेज़, निदेशक से मिलान | beneficial ownership घोषणा जोड़ें |
| GST वाला वेंडर जोड़ना | PAN, GSTIN, कंपनी हो तो CIN | आम तौर पर संपर्क से ज़्यादा कुछ नहीं | भुगतान के लिए बैंक खाता; देखिए वेंडर ऑनबोर्डिंग फ़्लो |
| मार्केटप्लेस पर प्रोपराइटर सेलर | हो तो GSTIN या Udyam | मालिक का PAN | नाम की तुलना legalName से कीजिए |
| गिग वर्कर को भुगतान | कोई नहीं | PAN, बैंक खाता | PAN और बैंक खाताधारक के नाम का मिलान |
| किराए के करार में मकान मालिक या किरायेदार | कोई नहीं | PAN | करार का पूरा प्रवाह e-stamp गाइडों में है |
| कंपनी वाला B2B व्यापारी | PAN, GSTIN, CIN | हस्ताक्षरकर्ता | स्थिति की जाँच समय-समय पर दोहराइए |
KYC और KYB आमने-सामने
| आयाम | KYC | KYB |
|---|---|---|
| विषय | एक प्राकृतिक व्यक्ति | कानूनी संस्था या कारोबार |
| मूल सवाल | क्या यह व्यक्ति वही है जो कहता है? | क्या संस्था मौजूद है, ठीक स्थिति में है, और उसे कौन नियंत्रित करता है? |
| भारत में मुख्य पहचानें | PAN, दूसरे सरकारी पहचान दस्तावेज़, बैंक खाता | CIN या LLPIN, संस्था का PAN, GSTIN, Udyam, पार्टनरशिप या ट्रस्ट डीड |
| शामिल लोग | ग्राहक खुद | निदेशक, पार्टनर या ट्रस्टी, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता, beneficial owner |
| लुकअप के अलावा सबूत | पते का सबूत; नीति माँगे तो फ़ोटो या liveness | संस्था के गठन के दस्तावेज़, बोर्ड प्रस्ताव या authorisation letter, स्वामित्व की घोषणा, चालू खाते का सबूत |
| समय के साथ बदलाव | धीमा: नाम, पता, संपर्क | तेज़: स्थिति, निदेशक, पंजीकृत कार्यालय, टैक्स रजिस्ट्रेशन |
| कब फ़ेल होता है | नाम बेमेल, अवैध पहचान, किसी और के नाम पर आवेदन | निष्क्रिय या हटाई गई संस्था, अधिकार नहीं, अस्पष्ट स्वामित्व, रजिस्ट्रेशनों में नाम बेमेल |
| कौन से StampMitra endpoint काम आते हैं | PAN, bank account, vehicle RC, voter ID, driving licence, passport | CIN, GSTIN, PAN to GSTIN, Udyam, PAN to Udyam, PAN, bank account |
ये शब्द कहाँ से आए और डिज़ाइन पर इसका क्या असर है
भारत में KYC के दायित्व कई जगह से आते हैं। Prevention of Money-laundering Act, 2002 और उसके नियम रिकॉर्ड रखने और ग्राहक की पहचान का ढाँचा तय करते हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक का KYC पर Master Direction उन संस्थाओं पर लागू होता है जिन्हें वह नियंत्रित करता है, जैसे बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ। SEBI, IRDAI और दूसरे क्षेत्रीय नियामकों के अपने निर्देश हैं, और भुगतान पार्टनर तथा बैंक अनुबंध में और शर्तें जोड़ देते हैं।
इससे दो व्यावहारिक बातें निकलती हैं। पहली, आपको कौन-सी जाँचें करनी हैं, यह आपके लाइसेंस और अनुबंधों से तय होता है, इसलिए सबसे सुरक्षित शुरुआत वही निर्देश है जो आपके नियामक या पार्टनर बैंक ने दिया है, किसी ब्लॉग से नहीं, इस गाइड से भी नहीं। दूसरी, उन निर्देशों में व्यक्तियों, कंपनियों, पार्टनरशिप फ़र्मों और ट्रस्टों के लिए अलग-अलग पहचान-कदम पहले से लिखे हैं। KYB का असली मतलब वही है, शब्द चाहे दस्तावेज़ में हो या न हो।
अगर आप नियंत्रित संस्था नहीं हैं, मसलन मार्केटप्लेस, SaaS या पेरोल टूल चलाते हैं, तो वही जाँचें compliance नहीं, जोखिम प्रबंधन हैं। आप उन्हें धोखाधड़ी और ख़राब पार्टियों को बाहर रखने के लिए चुनते हैं और जोखिम के हिसाब से घटा-बढ़ा सकते हैं। यही आज़ादी अपनी नीति लिखकर रखने की वजह भी है: बाद में आप समझा पाएँ कि एक वेंडर को हल्की जाँच क्यों मिली और दूसरे को भारी क्यों।
यह कानूनी सलाह नहीं है। जहाँ किसी फ़ैसले में नियम या सीमा मायने रखती हो, वहाँ मौजूदा पाठ देखिए और वकील से पूछिए।
व्यक्ति पर KYC में क्या-क्या होता है
किसी व्यक्ति के लिए सामान्य क्रम में चार हिस्से होते हैं।
पहचान। यह पक्का कीजिए कि पहचान असली है और उस नाम के व्यक्ति की है जो ग्राहक ने बताया। भारत में ज़्यादातर कारोबारी प्रवाहों में व्यावहारिक आधार PAN है: लुकअप रिकॉर्ड का नाम लौटाता है, और नाम भेजें तो मिलान का नतीजा भी। PAN न हो या काफ़ी न हो तो voter ID, driving licence और passport वही काम करते हैं, और हर एक का अपना StampMitra endpoint है।
पहचान पर मालिकाना। कठिन सवाल यह है कि सामने बैठा व्यक्ति धारक है या नहीं। PAN लुकअप अकेले इसका जवाब नहीं दे सकता, क्योंकि नंबर गुप्त नहीं होता। नीतियाँ इस ख़ाली जगह को अतिरिक्त कदमों से भरती हैं, जैसे दस्तावेज़ की फ़ोटो, liveness जाँच, या ग्राहक के नाम वाले खाते से लेन-देन। StampMitra के verification endpoint Aadhaar आधारित verification या चेहरे का मिलान नहीं देते, इसलिए आपकी नीति में ये ज़रूरी हों तो इन्हें कहीं और से लीजिए।
पता और संपर्क। पते का सबूत ग्राहक के दिए दस्तावेज़ों से आता है। संपर्क की पुष्टि कोड या लिंक भेजकर होती है, जो verification API के बाहर है।
भुगतान या फ़ंडिंग खाता। अगर ग्राहक को पैसा जाना है, तो पक्का कीजिए कि बैंक खाता मौजूद है और खाताधारक का नाम मेल खाता है। यह bank account verification endpoint का काम है, जिसे penny drop बनाम name match में विस्तार से समझाया गया है।
व्यक्ति पर KYC शायद ही कभी एक call होती है। वह एक छोटी कड़ी है, जिसमें सस्ती और निर्णायक जाँचें पहले चलती हैं। कर्ज़ के लिए यह कड़ी fintech और NBFC के लिए KYC वाले यूज़ केस में चलकर दिखाई गई है।
संस्था पर KYB में क्या-क्या होता है
संस्था की कड़ी लंबी होती है, और हर कड़ी अलग सवाल का जवाब देती है।
- अस्तित्व। क्या संस्था किसी रजिस्ट्री में है? कंपनी के लिए CIN लुकअप कंपनी का रिकॉर्ड लौटाता है। LLP के लिए रजिस्ट्री नंबर LLPIN है। प्रोपराइटरशिप का कंपनी रजिस्ट्री में कोई रिकॉर्ड नहीं होता, इसलिए अस्तित्व मालिक की पहचान और सहायक रजिस्ट्रेशनों पर टिकता है। पार्टनरशिप और ट्रस्ट का सबूत उनकी डीड और जहाँ लागू हो, राज्य के पंजीकरण से मिलता है।
- स्थिति। क्या वह चालू है? CIN के जवाब में
cinStatusऔरcompanyStatusआते हैं। GSTIN के जवाब मेंregistrationStatus। हटाई गई कंपनी, रद्द GST रजिस्ट्रेशन या निलंबित रजिस्ट्रेशन रुकने या समीक्षा के कारण हैं। - टैक्स पहचान। संस्था का PAN और GST रजिस्ट्रेशन क्या हैं, और क्या वे एक ही संस्था के हैं? दूसरे आधे का जवाब PAN to GSTIN लुकअप देता है।
- लोग। निदेशक, पार्टनर या ट्रस्टी कौन हैं? CIN के जवाब में निदेशकों की सूची DIN, नाम और पदनाम के साथ आती है। पार्टनरशिप और ट्रस्ट दस्तावेज़ों पर निर्भर हैं।
- अधिकार। क्या आवेदन करने वाला व्यक्ति संस्था को बाध्य कर सकता है? इसके लिए दस्तावेज़ चाहिए: बोर्ड प्रस्ताव, authorisation letter, पार्टनरशिप डीड की कोई धारा। कोई लुकअप यह नहीं लौटाता।
- स्वामित्व और नियंत्रण। अंततः संस्था का मालिक या नियंत्रक कौन है? इसका अलग हिस्सा नीचे है।
- फ़ंडिंग खाता। क्या संस्था के अपने नाम का बैंक खाता है? चालू खाते का सबूत, या bank account verification जहाँ खाताधारक का नाम संस्था के नाम से मिले।
- उद्देश्य और जोखिम। कारोबार क्या करता है, और क्या वह ऐसी श्रेणी में है जिसे आपकी नीति ऊँचे जोखिम का मानती है? यह फ़ैसले का सवाल है, जिसमें उद्योग कोड जहाँ हैं वहाँ मदद करते हैं।
लुकअप खुद GSTIN, CIN और Udyam से बिज़नेस वेरिफ़िकेशन में हैं, और हर पहचान क्या साबित कर सकती है और क्या नहीं, यह PAN, GSTIN और CIN में फ़र्क में समझाया है।
संस्था के प्रकार के हिसाब से KYB
कानूनी रूप बदलने के साथ चेकलिस्ट बदलती है। यह तालिका शुरुआती ढाँचा है, नियम नहीं: आपका नियामक या पार्टनर और माँग सकता है।
| संस्था का प्रकार | कौन-सी पहचानें लें | कौन-से लुकअप काम के | आम तौर पर कौन-से दस्तावेज़ |
|---|---|---|---|
| प्रोपराइटरशिप | मालिक का PAN; हो तो GSTIN और Udyam | PAN, GSTIN, Udyam, bank account | पते का सबूत, चालू खाते का सबूत, कारोबार जहाँ Udyam रखता हो वहाँ Udyam प्रमाणपत्र |
| पार्टनरशिप फ़र्म | फ़र्म का PAN; रजिस्टर्ड हो तो GSTIN | PAN, GSTIN, bank account | पार्टनरशिप डीड, authorisation letter |
| LLP | फ़र्म PAN; LLPIN; रजिस्टर्ड हो तो GSTIN | PAN, GSTIN, bank account | निगमन प्रमाणपत्र, authorisation letter |
| प्राइवेट या पब्लिक कंपनी | कंपनी PAN, GSTIN, CIN | PAN, GSTIN, CIN, bank account | निगमन प्रमाणपत्र, GST प्रमाणपत्र, authorisation letter, बोर्ड प्रस्ताव (आवेदक निदेशक हो तो नहीं) |
| ट्रस्ट या सोसाइटी | ट्रस्ट PAN; रजिस्टर्ड हो तो GSTIN | PAN, GSTIN, bank account | ट्रस्ट डीड या पंजीकरण, authorisation letter |
यह कोई काल्पनिक ढाँचा नहीं है। StampMitra अपने ग्राहकों से लगभग यही माँगता है। production access फ़ॉर्म आवेदक का प्रकार लेता है (व्यक्ति, प्रोपराइटरशिप, पार्टनरशिप फ़र्म, LLP, प्राइवेट लिमिटेड, पब्लिक लिमिटेड, ट्रस्ट या सोसाइटी), उम्मीद करता है कि PAN का चौथा अक्षर उस प्रकार से मेल खाए (P, F, C, T या A), LLP और कंपनी से CIN और कंपनी से GSTIN माँगता है, और दाएँ कॉलम वाले दस्तावेज़ लेता है। जब आवेदक कंपनी का निदेशक हो तो बोर्ड प्रस्ताव की शर्त हट जाती है। यह छोटी बात आपके अपने प्रवाह का नमूना है: जहाँ लुकअप पहले ही वही भरोसा दे चुका हो, वहाँ भारी सबूत छोड़ देने का नियम।
प्रोपराइटर: जहाँ KYC और KYB घुल जाते हैं
प्रोपराइटरशिप कोई अलग कानूनी व्यक्ति नहीं है। कारोबार वही व्यक्ति है जो किसी नाम से व्यापार करता है। इसलिए यह कारोबारी सबूत जुड़ा KYC का मामला है। एक उदाहरण लीजिए: "शर्मा ट्रेडर्स" नाम से कपड़े का थोक करने वाले सुरेश शर्मा।
- पहचान और टैक्स: सुरेश का PAN, वैसे ही जाँचा जाए जैसे किसी भी व्यक्ति का।
- कारोबार का अस्तित्व: GSTIN, Udyam पंजीकरण, दुकान और प्रतिष्ठान का लाइसेंस, या कारोबार के नाम का चालू खाता, जो भी वे दिखा सकें। हर प्रोपराइटर के लिए कोई एक अनिवार्य नहीं होता, और आप क्या माँगें यह आपकी नीति और कारोबार के काम पर निर्भर है।
- नाम का मिलान: PAN में सुरेश का नाम है, जबकि GSTIN में वही नाम
legalNameहै और "शर्मा ट्रेडर्स"tradeName। नाम की तुलनाlegalNameसे कीजिए, ट्रेड नाम से कभी नहीं। - फ़ंडिंग खाता: सुरेश के नाम का या कारोबार के नाम का बैंक खाता। दोनों मिलते हैं। पहले से तय कर लीजिए कि कौन-सा मानेंगे और बेमेल को कैसे सँभालेंगे।
प्रोडक्ट यहीं अक्सर चूकते हैं: वे दो फ़ॉर्म बना देते हैं, एक उपभोक्ता के लिए और एक कंपनी के लिए, और प्रोपराइटर के लिए कोई जगह नहीं रहती। प्रोपराइटर को ऐसे व्यक्ति की तरह बनाइए जिसके साथ वैकल्पिक कारोबार वाला हिस्सा है, और वैकल्पिक फ़ील्ड भरते ही अतिरिक्त लुकअप चलने दीजिए।
Beneficial ownership और नियंत्रण
Beneficial ownership का सवाल "निदेशक कौन हैं" से अलग है। निदेशक कंपनी चलाते हैं। Beneficial owner वे प्राकृतिक व्यक्ति हैं जो अंततः उसके मालिक हैं या उस पर नियंत्रण रखते हैं, चाहे दूसरी संस्थाओं की परतों के ज़रिए। नियमों की परिभाषाएँ संस्था के प्रकार के अनुसार स्वामित्व की सीमाएँ इस्तेमाल करती हैं, जो समय-समय पर बदली गई हैं, इसलिए जो आप पर लागू हो उसका मौजूदा नियम देखिए।
रजिस्ट्री लुकअप से यह तय नहीं हो सकता। CIN के जवाब में निदेशक आते हैं, यह शेयरधारक रजिस्टर नहीं है। व्यवहार में KYB प्रवाह संस्था से beneficial ownership की घोषणा लेता है, शेयरहोल्डिंग पैटर्न जैसे दस्तावेज़ों के साथ, और घोषणा में नामित उन प्राकृतिक व्यक्तियों पर KYC चलाता है जो संबंधित सीमा से ऊपर हैं। जहाँ कोई मालिक खुद एक कंपनी हो, वहाँ आप उस कंपनी पर फिर KYB चलाते हैं, तब तक जब तक इंसान तक न पहुँच जाएँ।
डिज़ाइन के दो बिंदु। घोषणा को संरचित डेटा की तरह रखिए (नाम, पहचान, प्रतिशत या नियंत्रण का आधार, घोषणा की तारीख़), सिर्फ़ अटैचमेंट की तरह नहीं, ताकि उसे ताज़ा किया जा सके और खोजा जा सके। और CIN लुकअप की निदेशक सूची को मिलान की जाँच मानिए: जिस घोषणा में एक भी नाम निदेशकों या दस्तावेज़ों में न दिखे, उस पर इंसानी नज़र पड़नी चाहिए।
दोनों प्रवाहों को एक pipeline बनाना
सबसे ज़्यादा इंजीनियरिंग समय इस ग़लती में जाता है कि KYC और KYB को अलग-अलग ऐप्लिकेशन बना दिया जाए। जाँचें वही बुनियादी इकाइयाँ हैं, अलग मेल में। इसलिए एक "पक्ष" (party) रखिए और उसका प्रकार जाँचें चुनने दीजिए।
import os, requests
BASE = "https://api-b2b.stampmitra.in/v1/verify"
HEADERS = {"Authorization": f"Bearer {os.environ['STAMPMITRA_API_KEY']}", "Content-Type": "application/json"}
def verify(path: str, body: dict) -> dict:
r = requests.post(f"{BASE}/{path}", json=body, headers=HEADERS, timeout=10)
data = r.json()
if not r.ok:
return {"ok": False, "status": r.status_code, "code": data["error"]["code"], "request_id": data["error"]["requestId"]}
return {"ok": True, "data": data}
PLAN = {
"INDIVIDUAL": lambda p: [("pan", {"pan": p["pan"], "name": p["name"]}), ("bank-account", p["bank"])],
"PROPRIETORSHIP": lambda p: [("pan", {"pan": p["pan"], "name": p["name"]})]
+ ([("gstin", {"gstin": p["gstin"], "businessName": p.get("trade_name")})] if p.get("gstin") else []),
"PRIVATE_LTD": lambda p: [
("pan", {"pan": p["pan"], "name": p["name"]}),
("gstin", {"gstin": p["gstin"], "businessName": p["name"]}),
("cin", {"cin": p["cin"]}),
],
}
def run_checks(party: dict) -> list:
results = []
for path, body in PLAN.get(party["type"], PLAN["INDIVIDUAL"])(party):
r = verify(path, body)
results.append({"path": path, **r})
if not r["ok"] or r["data"].get("valid") is False:
break # पहली पक्की विफलता पर रुकिए, आगे की calls सिर्फ़ पैसा खर्च कराएँगी
return resultsऔर संस्था के लिए हस्ताक्षरकर्ता की जाँच cURL से, ताकि कच्चा अनुरोध साफ़ दिखे:
curl -X POST "https://api-b2b.stampmitra.in/v1/verify/cin" \
-H "Authorization: Bearer $STAMPMITRA_API_KEY" \
-H "Content-Type: application/json" \
-d '{"cin":"U74999DL2015PTC284009"}'जवाब में directors की सूची आती है। अगर हस्ताक्षरकर्ता का नाम उसमें मिल जाए, तो वह निदेशक है, और यही वह व्युत्पन्न तथ्य है जिससे आप भारी दस्तावेज़ की शर्त हटा सकते हैं, जैसे StampMitra का फ़ॉर्म बोर्ड प्रस्ताव के साथ करता है। नाम की यह तुलना जान-बूझकर मोटी रखी जाए तो ठीक है, पर production में नाम को पहले सामान्य रूप में लाइए और निदेशकों के DIN ऑडिट रिकॉर्ड में रखिए।
पक्ष और रिश्तों का डेटा मॉडल
पक्षों की एक तालिका और रिश्तों की एक तालिका रखिए। पक्ष व्यक्ति या संस्था है। रिश्ता दो पक्षों को एक भूमिका से जोड़ता है: हस्ताक्षरकर्ता, निदेशक, मालिक, प्रोपराइटर। यह सपाट ग्राहक पंक्ति से भारी लगता है, पर यही वह आकार है जिसमें एक व्यक्ति दो कंपनियों का हस्ताक्षरकर्ता बनकर दोहराया नहीं जाता, और एक कंपनी दूसरी कंपनी की मालिक हो सकती है।
{
"parties": [
{ "id": "p1", "kind": "ENTITY", "type": "PRIVATE_LTD", "name": "Jane Doe Enterprises Private Limited", "pan": "ABCDE1234F", "cin": "U74999DL2015PTC284009" },
{ "id": "p2", "kind": "PERSON", "name": "Rahul Kumar", "pan": "PQRSX1234L" }
],
"relationships": [
{ "from": "p2", "to": "p1", "role": "DIRECTOR", "evidence": "SMV-20260927-6R38Y3" },
{ "from": "p2", "to": "p1", "role": "AUTHORISED_SIGNATORY", "evidence": "doc_authorisation_letter_0142" }
]
}दो बातें ध्यान देने की हैं। evidence फ़ील्ड या तो API के referenceId की तरफ़ इशारा करता है या दस्तावेज़ की id की, यानी समीक्षक को स्रोत चाहे जो हो, सबूतों की एक ही सूची दिखती है। और निदेशक वाला रिश्ता लुकअप से निकला है जबकि हस्ताक्षरकर्ता वाला दस्तावेज़ पर टिका है, यह फ़र्क आपके टूल में दिखता रहना चाहिए।
एक पूरा उदाहरण: कंपनी की कर्ज़ अर्ज़ी और उसका हस्ताक्षरकर्ता
मान लीजिए एक काल्पनिक ऋणदाता को Jane Doe Enterprises Private Limited की अर्ज़ी मिलती है, जिस पर Rahul Kumar के हस्ताक्षर हैं।
- आवेदक का प्रकार प्राइवेट लिमिटेड है, इसलिए योजना है: संस्था का PAN, GSTIN और CIN, फिर हस्ताक्षरकर्ता का PAN।
- संस्था के PAN का चौथा अक्षर
Cहै, यानी संगत। PAN लुकअपvalid: trueलौटाता है और पंजीकृत नाम मेल खाता है। - GSTIN लुकअप
registrationStatus: Activeलौटाता है। उसमें बैठा PAN संस्था के PAN के बराबर है। principal place of business वही शहर है जो अर्ज़ी में है। - CIN लुकअप 2015 में बनी चालू कंपनी दिखाता है, जिसके निदेशकों में Rahul Kumar नाम का एक निदेशक है।
- हस्ताक्षरकर्ता के निजी PAN का लुकअप Rahul Kumar से मेल खाता है। वह सूचीबद्ध निदेशक भी है, इसलिए नीति बोर्ड प्रस्ताव की शर्त छोड़ देती है और सिर्फ़ authorisation letter माँगती है।
- Beneficial ownership घोषणा में सीमा से ऊपर के दो शेयरधारकों के नाम हैं। दोनों पर व्यक्तिगत KYC चलती है। एक का नाम PAN रिकॉर्ड से थोड़ा अलग निकलता है: स्कोर सीमा पर है और मामला समीक्षक के पास जाता है, जो PAN कार्ड की तस्वीर देखकर उसे मंज़ूर कर देता है।
- फ़ंडिंग खाता कंपनी के नाम का चालू खाता है। bank account verification से लौटा नाम कंपनी के नाम से मेल खाता है।
सात जाँचें, जिनमें दो हाथ से। सब कुछ हर call के referenceId के साथ अर्ज़ी से जोड़कर रखा गया है। छह महीने बाद वही कर्ज़दार लौटे तो सिर्फ़ स्थिति वाले लुकअप दोहराने पड़ेंगे।
बनाने से पहले नियामक या पार्टनर बैंक से पूछने लायक सवाल
चेकलिस्ट कोड के बाद आए तो इंजीनियरिंग का समय बर्बाद होता है। ये सवाल पहले पूछिए और जवाब अपनी नीति में लिख लीजिए।
- हर तरह के ग्राहक के लिए कौन-से पहचान दस्तावेज़ और रजिस्ट्री जाँचें अनिवार्य हैं और कौन-सी वैकल्पिक?
- क्या डेटा प्रदाता के लुकअप को सबूत माना जाता है, या दस्तावेज़ की प्रति रखनी ही होगी? कई नीतियों में दोनों चाहिए, जिसमें लुकअप पहला फाटक है।
- कंपनियों, पार्टनरशिप फ़र्मों और ट्रस्टों के लिए beneficial ownership की सीमा क्या है, और उसका सबूत कैसे देना है?
- KYC रिकॉर्ड कितने समय तक रखने हैं, किस तारीख़ से गिनकर, और किस रूप में?
- रिकॉर्ड कितनी बार ताज़ा करने हैं, और क्या अंतराल जोखिम की श्रेणी पर निर्भर है?
- जाँच फ़ेल हो तो क्या होना चाहिए: reject, समीक्षा के लिए रोकना, या रिपोर्ट करना?
- असली निजी डेटा कौन देख सकता है, और क्या उस पहुँच का लॉग रखना है?
इन जवाबों से आपका डेटा मॉडल किसी भी API से ज़्यादा तय होता है। जो नीति दस्तावेज़ की प्रति माँगे, उसे ऑब्जेक्ट स्टोरेज और रिटेंशन के नियम चाहिए। जो नीति लुकअप को सबूत मान ले, उसे बस referenceId, तारीख़ और वे फ़ील्ड चाहिए जिन पर आपने भरोसा किया। किसी सामान्य गाइड से इनका अंदाज़ा मत लगाइए।
सही चीज़ें सही शब्दों में माँगना
पहली स्क्रीन के शब्द तय करते हैं कि कितने आवेदक पूरा करेंगे। तीन आदतें मदद करती हैं।
संस्था वाला सवाल सीधे शब्दों में पूछिए। "क्या आप व्यक्ति के रूप में आवेदन कर रहे हैं या किसी कारोबार की तरफ़ से?" सबको समझ आता है। "Constitution चुनिए" नहीं आता। जवाब के बाद सिर्फ़ वही फ़ील्ड दिखाइए जो उस प्रकार को चाहिए, जैसे StampMitra का ऑनबोर्डिंग फ़ॉर्म आवेदक के प्रकार के साथ अपने ज़रूरी फ़ील्ड बदलता है।
बताइए कि क्यों पूछ रहे हैं। PAN फ़ील्ड के नीचे एक पंक्ति कि आप नाम को सरकारी रिकॉर्ड से मिलाते हैं, और दस्तावेज़ अपलोड के नीचे एक पंक्ति कि उसका क्या इस्तेमाल होगा, बीच में छोड़ जाने वालों को घटाती है और वही उद्देश्य का कथन भी है जो आपके privacy notice को चाहिए।
जहाँ नीति इजाज़त दे, वहाँ लुकअप को दस्तावेज़ की जगह लेने दीजिए। अगर CIN लुकअप में आवेदक निदेशक दिखता है, तो बोर्ड प्रस्ताव माँगना भरोसा बढ़ाए बिना रुकावट बढ़ाता है। इसे नियम की तरह लिखिए और आवेदक को बताइए कि अब उसे क्या अपलोड नहीं करना।
बेमेल को सवाल की तरह लीजिए, एरर की तरह नहीं। "इस PAN पर नाम आपके भरे नाम से थोड़ा अलग है। क्या यही आपका पूरा कानूनी नाम है?" "Verification failed" से ज़्यादा आवेदकों को वापस लाता है। सख़्त विफलता अवैध पहचानों और निष्क्रिय संस्थाओं के लिए रखिए।
समीक्षा की कतार में केस आए तो समीक्षक को क्या दिखे
हाथ से समीक्षा की कतार डिज़ाइन का हिस्सा है, क्योंकि दोनों प्रवाह सीमा के मामले बनाते हैं। हर केस के लिए समीक्षक को एक स्क्रीन दीजिए: दावा किया गया पक्ष और उसका प्रकार; हर लुकअप का नतीजा उसके referenceId और समय के साथ; केस को क्यों भेजा गया, यानी कौन-सी जाँच और कौन-सी सीमा; अपलोड किए दस्तावेज़; लुकअप और दस्तावेज़ों से निकले रिश्ते; और उपलब्ध कदम (मंज़ूर, अस्वीकार, दस्तावेज़ माँगें, ऊपर भेजें)। यह भी दर्ज कीजिए कि फ़ैसला किसने और क्यों लिया। यही स्क्रीन वह चीज़ है जिसे आप तब निर्यात करेंगे जब कोई पार्टनर या ऑडिटर पूछे कि फ़ैसला कैसे हुआ।
जोखिम के हिसाब से गहराई
सबके लिए एक भारी चेकलिस्ट अच्छे ग्राहकों को खोती है और पैसा जलाती है। जोखिम आधारित तरीक़े में शुरू में कुछ इनपुट (संस्था का प्रकार, प्रोडक्ट, अपेक्षित रकम, भौगोलिक क्षेत्र, उद्योग) से एक स्तर तय होता है और हर स्तर पर जाँचों का एक समूह जुड़ता है।
| स्तर | आम कारण | जाँचें |
|---|---|---|
| हल्का | कम रकम, व्यक्ति, जाना-माना चैनल | नाम मिलान के साथ PAN लुकअप |
| मानक | मध्यम रकम या कोई भी कारोबार | ऊपर की जाँचें और bank account verification; संस्थाओं के लिए GSTIN और CIN |
| बढ़ा हुआ | ऊँची रकम, जटिल स्वामित्व, ऊँचे जोखिम की श्रेणी, बेमेल मिले | मानक के साथ beneficial ownership घोषणा, अधिकार के दस्तावेज़, हाथ से समीक्षा, ज़्यादा बार ताज़ा करना |
स्तर के नियम लिखकर रखिए और उनके संस्करण बनाइए। जब नियामक या ऑडिटर पूछे कि किसी ग्राहक को यह गहराई क्यों मिली, तो जवाब कोई नियम और उसका संस्करण होना चाहिए, किसी की याददाश्त नहीं। StampMitra का production access फ़ॉर्म भी कुछ ऐसा ही करता है: वहाँ bank account verification और e-Sign को ऊँचे जोखिम वाले प्रोडक्ट के रूप में चिह्नित किया गया है, जबकि PAN, GSTIN, CIN, Udyam और e-Stamp को कम जोखिम का माना गया है।
कितनी बार दोबारा जाँचें
व्यक्ति धीरे बदलते हैं। संस्थाएँ नहीं। GST रजिस्ट्रेशन रद्द हो सकता है, कंपनी हटाई जा सकती है या उसके निदेशक बदल सकते हैं, और PAN की स्थिति बदल सकती है। हर स्तर और हर पहचान के लिए ताज़ा करने का अंतराल तय कीजिए: रजिस्ट्रेशन और कंपनी की स्थिति ज़्यादा बार, PAN कम बार। घड़ी के साथ-साथ घटनाओं पर भी दोहराइए: नए बैंक खाते में भुगतान, हस्ताक्षरकर्ता का बदलाव, बड़ा लेन-देन, ग्राहक की शिकायत।
हर दोबारा जाँच production दर पर नई बिल होने वाली call है और नया referenceId बनाती है, इसलिए उसका बजट रखिए। अपने सक्रिय संस्था-आधार पर स्थिति वाले लुकअप दोहराने की लागत अक्सर उस संस्था को भुगतान करने की लागत के सामने छोटी होती है जो अब मौजूद नहीं।
जहाँ ख़र्च बढ़ता है
तीन निदेशकों, दो beneficial owners और एक हस्ताक्षरकर्ता वाली कंपनी में छह व्यक्ति और एक संस्था दायरे में हैं, और हर एक लुकअप खड़ा कर सकता है। लागत ग्राहकों की संख्या से नहीं, पक्षों की संख्या से बढ़ती है। पहले से योजना बनाइए। पहले संस्था जाँचिए और विफल हो तो रुक जाइए, ताकि बंद हो चुकी कंपनी से जुड़े लोगों की जाँच पर पैसा न लगे। सिर्फ़ उन लोगों की जाँच कीजिए जिन्हें आपकी नीति माँगती है: हस्ताक्षरकर्ता और सीमा से ऊपर के मालिक, हर निदेशक नहीं। standard pay-as-you-go पर PAN का लुकअप ₹5 और bank account की जाँच ₹4 प्रति call है, प्लान में दरें और कम हैं; मौजूदा आँकड़े pricing पेज पर हैं। sandbox की calls मुफ़्त हैं और wallet से कभी नहीं कटतीं, इसलिए पूरी pipeline पहले वहीं बनाइए और टेस्ट कीजिए।
API क्या कवर नहीं करती
किनारे साफ़ बता दीजिए, क्योंकि ऑडिट में दिक़्क़तें यहीं मिलती हैं।
- Aadhaar आधारित verification नहीं दी जाती।
- Verification endpoint में sanctions, politically exposed person या adverse media की स्क्रीनिंग नहीं है।
- Beneficial ownership का कोई लुकअप नहीं है; CIN के जवाब में निदेशक आते हैं, शेयरधारक नहीं।
- दस्तावेज़ (बोर्ड प्रस्ताव, डीड, पते का सबूत) आप खुद इकट्ठा और समीक्षित करते हैं। StampMitra का अपना production access प्रवाह अपने ग्राहकों के दस्तावेज़ों की समीक्षा करता है, पर वह भीतरी ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया है, आपके लिए बुलाने लायक API नहीं।
- नतीजे डेटा स्रोत की आख़िरी ताज़गी को दिखाते हैं, इसलिए बहुत हाल का बदलाव शायद अभी न दिखे। देखिए API और सरकारी पोर्टल के नतीजों में फ़र्क।
दोनों प्रवाहों में निजी डेटा का रखरखाव
KYC और KYB दोनों निजी डेटा इकट्ठा करते हैं: नाम, PAN, बैंक खाता संख्या, निदेशकों के नाम और DIN, ईमेल पते। उतना ही लीजिए जितना जाँच को चाहिए, नोटिस में कारण बताइए, उसे उतने ही समय रखिए जितना आपकी नीति या कानून माँगे, और देखने वालों को सीमित कीजिए। Digital Personal Data Protection Act, 2023 निजी डेटा का सामान्य ढाँचा है, और क्षेत्रीय नियम KYC रिकॉर्ड के लिए लंबा रिटेंशन जोड़ सकते हैं, इसलिए रिटेंशन की अवधि अपने compliance मालिक से तय कीजिए, "हमेशा के लिए" या "तुरंत मिटाएँ" को डिफ़ॉल्ट मत बनाइए। लॉग में पहचानें मास्क कीजिए। फ़ील्ड-दर-फ़ील्ड बात verification कॉल से क्या लॉग करें में है।
आम ग़लतियाँ
- कंपनी के GSTIN को इस बात का सबूत मान लेना कि हस्ताक्षरकर्ता को अधिकार है। वह दिखाता ही नहीं कि दस्तख़त कौन कर सकता है।
- कारोबारी ग्राहक पर सिर्फ़ संस्था की जाँचें चलाना और आवेदन करने वाले व्यक्ति को कभी न जाँचना।
- कंपनी के PAN पर उपभोक्ता जैसी PAN जाँच चलाकर उसे KYB कह देना।
- हस्ताक्षरकर्ता के नाम को निदेशक सूची की जगह कंपनी के नाम से मिलाना।
- प्रोपराइटर को बिना किसी कारोबारी सबूत के निकल जाने देना, क्योंकि फ़ॉर्म में सिर्फ़ उपभोक्ता वाला रास्ता है।
- सिर्फ़ पास या फ़ेल का नतीजा रखना, ताकि बाद की ताज़ा जाँच दिखा न सके कि क्या बदला।
- डेमो में sandbox के नतीजों को असली जाँच की तरह दिखाना। sandbox सैंपल डेटा लौटाता है।
शब्दावली
| शब्द | मतलब |
|---|---|
| KYC | Know Your Customer: ग्राहक, आम तौर पर व्यक्ति, की पहचान और जाँच |
| KYB | Know Your Business: कानूनी संस्था, उसके मालिकों और उसकी तरफ़ से काम करने के अधिकार की जाँच |
| CDD | Customer due diligence: वह बड़ी प्रक्रिया जिसका KYC हिस्सा है |
| Beneficial owner | वह प्राकृतिक व्यक्ति जो अंततः संस्था का मालिक है या उस पर नियंत्रण रखता है |
| DIN | निदेशक पहचान संख्या |
| CIN | कंपनी का कॉर्पोरेट पहचान नंबर |
| LLPIN | सीमित देयता भागीदारी की पहचान संख्या |
| OVD | Officially valid document, KYC में मान्य पहचान दस्तावेज़ |
| हस्ताक्षरकर्ता | वह व्यक्ति जो संस्था की तरफ़ से दस्तख़त करता है |
आगे क्या करें
अपने संस्था प्रकार चुनिए, ऊपर की तालिका अपनी नीति में उतारिए और निशान लगाइए कि कौन-सी जाँचें लुकअप हैं और कौन-सी दस्तावेज़। quickstart से sandbox key लीजिए, फिर verification docs से PAN, GSTIN और CIN की calls आज़माइए। वेंडर पर जाँचों के क्रम के लिए वेंडर ऑनबोर्डिंग फ़्लो पढ़िए। live जाने से पहले sandbox बनाम production: क्या टेस्ट हो सकता है पढ़ लीजिए। जो इनपुट यहाँ नहीं आया, उसका सवाल support को भेजिए।
API reference एक नज़र में
PAN
POST /v1/verify/panRequest parameters
| Field | Type | Description |
|---|---|---|
Authorizationrequired | header | Bearer <api-key> (e.g. sk_test_... in sandbox, sk_live_... in production). The x-api-key header is also accepted. |
panrequired | string | PAN, format ABCDE1234F. |
name | string | Name to match against records (max 256 chars). |
POST /v1/verify/pan{
"referenceId": "SMV-20260927-8F42K7",
"pan": "ABCDE1234F",
"type": "Individual",
"valid": true,
"registeredName": "RAHUL KUMAR",
"fatherName": "SURESH KUMAR",
"panStatus": "VALID",
"panStatusCode": "E",
"panStatusDescription": "Existing and valid PAN",
"nameMatchResult": "MATCH",
"nameMatchScore": "100",
"aadhaarSeedingStatus": "y",
"aadhaarSeedingStatusDescription": "Aadhaar linked",
"lastUpdatedAt": "2023-04-01",
"message": "PAN is Valid"
}POST /v1/verify/panPAN: ₹5 per successful call, pay-as-you-go (lower on Growth and Scale).
Company CIN
POST /v1/verify/cinRequest parameters
| Field | Type | Description |
|---|---|---|
Authorizationrequired | header | Bearer <api-key> (e.g. sk_test_... in sandbox, sk_live_... in production). The x-api-key header is also accepted. |
cinrequired | string | Corporate Identification Number (21 characters) or LLPIN, for example U74999DL2015PTC284009. |
POST /v1/verify/cin{
"referenceId": "SMV-20260927-6R38Y3",
"verificationId": "VRF-6C2N9V4HQ7ZE",
"valid": true,
"status": "VALID",
"cin": "U72900KA2015PTC082988",
"companyName": "COMPANY NAME",
"registrationNumber": 82987,
"incorporationDate": "2015-09-23",
"cinStatus": "ACTIVE",
"email": "[email protected]",
"incorporationCountry": "INDIA",
"directorDetails": [
{
"din": "07168822",
"name": "Frank Kelvin",
"dob": "1997-07-21",
"designation": "DIRECTOR",
"address": "ST BED KORAMANGALA, BANGALORE, KARNATAKA, INDIA, 566634"
},
{
"din": "07168826",
"name": "John Doe",
"dob": "1997-02-07",
"designation": "DIRECTOR",
"address": "GAUTAM NAGAR, NOIDA, UTTAR PRADESH, INDIA, 211361"
}
],
"companyStatus": "ACTIVE",
"directors": [
{
"din": "07168822",
"name": "Frank Kelvin",
"designation": "DIRECTOR"
},
{
"din": "07168826",
"name": "John Doe",
"designation": "DIRECTOR"
}
]
}POST /v1/verify/cinCompany CIN: ₹5 per successful call, pay-as-you-go (lower on Growth and Scale).
Bank Account
POST /v1/verify/bank-accountRequest parameters
| Field | Type | Description |
|---|---|---|
Authorizationrequired | header | Bearer <api-key> (e.g. sk_test_... in sandbox, sk_live_... in production). The x-api-key header is also accepted. |
accountNumberrequired | string | 9-18 digit numeric bank account number. |
ifscrequired | string | 11-character IFSC code, e.g. ICIC0001234. |
name | string | Beneficiary name to match. |
phone | string | Account holder's 10-digit Indian mobile number, when available; improves match confidence. |
POST /v1/verify/bank-account{
"referenceId": "SMV-20260927-3B71A0",
"valid": true,
"nameAtBank": "RAVI KUMAR",
"bankName": "ICICI Bank",
"utr": "017952100012345",
"city": "Mumbai",
"branch": "Andheri West",
"micr": "400229002",
"nameMatchScore": "100",
"nameMatchResult": "GOOD_MATCH",
"accountStatus": "ACCOUNT_IS_VALID",
"accountStatusCode": "1",
"ifscDetails": {
"bank": "ICICI Bank",
"ifsc": "ICIC0001234",
"micr": "400229002",
"address": "Andheri West, Mumbai",
"city": "Mumbai",
"state": "Maharashtra",
"branch": "Andheri West"
}
}POST /v1/verify/bank-accountBank Account: ₹4 per successful call, pay-as-you-go (lower on Growth and Scale).
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
KYC और KYB में क्या फ़र्क है?
KYC एक प्राकृतिक व्यक्ति की जाँच है: वह कौन है और पहचान उसकी है या नहीं। KYB एक कानूनी संस्था की जाँच है: वह मौजूद है, उसकी स्थिति क्या है, उसे कौन चलाता और नियंत्रित करता है, और उसकी तरफ़ से दस्तख़त कौन कर सकता है। कारोबारी ग्राहक पर आम तौर पर दोनों लगती हैं।
क्या भारत में KYB कानूनी रूप से ज़रूरी है?
भारतीय नियम व्यक्तियों और कानूनी संस्थाओं, दोनों के लिए KYC और customer due diligence की बात करते हैं, और नियंत्रित संस्थाएँ अपने नियामक के निर्देश मानती हैं। KYB उसी काम के संस्था वाले हिस्से का उद्योग-नाम है, इसलिए आपके दायित्व नियामक और अनुबंध से आते हैं, शब्द से नहीं।
प्रोपराइटर पर KYB लगेगा या KYC?
प्रोपराइटरशिप अलग कानूनी व्यक्ति नहीं है, इसलिए यह कारोबारी सबूत जुड़ा KYC का मामला है। मालिक का PAN किसी भी व्यक्ति की तरह जाँचिए, फिर GSTIN, Udyam, लाइसेंस या चालू खाते में से वह माँगिए जो आपकी नीति कहती है।
StampMitra के कौन-से endpoint KYB में मदद करते हैं?
CIN, GSTIN, PAN to GSTIN, Udyam, PAN to Udyam, PAN और bank account endpoint रजिस्ट्री और टैक्स पहचान वाले हिस्से में मदद करते हैं। अधिकार के दस्तावेज़, beneficial ownership घोषणा और गठन के दस्तावेज़ आप खुद इकट्ठा और समीक्षित करते हैं।
क्या API से beneficial owner की जाँच हो सकती है?
सिर्फ़ रजिस्ट्री लुकअप से नहीं। CIN के जवाब में निदेशक आते हैं, शेयरधारक नहीं। व्यवहार में आप सहायक दस्तावेज़ों के साथ beneficial ownership की घोषणा लेते हैं और उसमें नामित, आप पर लागू सीमा से ऊपर के व्यक्तियों पर व्यक्तिगत KYC चलाते हैं।
कैसे जाँचें कि हस्ताक्षरकर्ता कंपनी की तरफ़ से काम कर सकता है?
हस्ताक्षरकर्ता को CIN लुकअप से आए निदेशकों से मिलाइए, फिर बोर्ड प्रस्ताव या authorisation letter माँगिए। लुकअप दिखाता है कि निदेशक कौन हैं, यह नहीं कि कंपनी ने किसे अधिकृत किया है।
क्या StampMitra Aadhaar आधारित verification देता है?
नहीं। StampMitra Aadhaar आधारित verification नहीं देता। पहचान की जाँच PAN और दूसरे पहचान दस्तावेज़ों के endpoint से होती है, और bank account verification भुगतान वाले खाते की पुष्टि करता है। आपकी नीति में liveness या स्वामित्व वाला कदम चाहिए तो उसे अलग से लीजिए।
किसी कारोबार की दोबारा जाँच कितनी बार करें?
संस्थाएँ व्यक्तियों से तेज़ बदलती हैं, इसलिए GST रजिस्ट्रेशन और कंपनी की स्थिति जैसी जाँचें जोखिम के हिसाब से तय समय पर और नए भुगतान खाते या हस्ताक्षरकर्ता बदलने जैसी घटनाओं पर ताज़ा कीजिए। हर बार की जाँच नई बिल होने वाली call है और उसका अपना referenceId है।
क्या KYC और KYB एक ही कोड से सँभालने चाहिए?
हाँ। एक party बनाइए जो व्यक्ति या संस्था हो, पक्षों को निदेशक या हस्ताक्षरकर्ता जैसी भूमिकाओं से जोड़िए और जाँचें party के प्रकार से चुनिए। दो अलग ऐप्लिकेशन वही बुनियादी हिस्से दोहराते हैं और प्रोपराइटर के लिए कोई जगह नहीं छोड़ते।
PAN का नाम आवेदन के नाम से थोड़ा अलग हो तो क्या करें?
पहले आवेदक से सवाल पूछिए, फिर उसे समीक्षा का मामला मानिए। अक्षरों का केस और विराम चिह्न एक कीजिए, API जहाँ स्कोर देती है वहाँ उसे इस्तेमाल कीजिए, और सख़्त reject अवैध पहचान और निष्क्रिय संस्था के लिए रखिए।
स्रोत
- भारतीय रिज़र्व बैंक, KYC पर Master Direction (संशोधित रूप में): https://www.rbi.org.in (मौजूदा एकीकृत पाठ और सीमाएँ वहीं देखिए, 2026)।
- Prevention of Money-laundering Act, 2002 और रिकॉर्ड रखरखाव नियम, भारत सरकार के विधायी पोर्टल पर: https://www.indiacode.nic.in (2026)।
- Digital Personal Data Protection Act, 2023, उसी पोर्टल पर (2026)।
- कंपनी मामलों का मंत्रालय, कंपनी और LLP का मास्टर डेटा: https://www.mca.gov.in (2026)।
- संस्था के प्रकार, ज़रूरी दस्तावेज़ और जोखिम चिह्नों के लिए StampMitra API reference डेटा और production access फ़ॉर्म के विकल्प, जैसा इस रिपॉज़िटरी में 2026-10-29 को है।